श्री कन्हैया गौशाला , जोधपुर के वेब पटल पर आपका स्वागत है

श्री कन्हैया गौशाला, जोधपुर की स्थापना एवं विकास

कन्हैया गौशाला जोधपुर का प्रारंभ वर्ष १९९४ में गौ हत्या के लिए जाते हुए गोवंश को यहां के समाज सेवकों ने बचाकर संघ की पाल रोड स्थिति  भूमि पर रखने का निर्णय लिया इस हेतु  श्री कन्हैया गौशाला  की स्थापना की गई। इस कार्य में मुख्य समाजसेवी कार्यकर्ता स्वर्गीय त्रिलोक चंद जी गोलेछा, स्वर्गीय मानिक चंद जी संचेती, स्वर्गीय मधुसूदन जी  व्यास, स्वर्गीय दुर्गा प्रसाद जी साबू, स्वर्गीय महेंद्र जी लोढ़ा, स्वर्गीय भंवर लाल जी कोठारी व स्वर्गीय आसु लाल जी बडेरा का सहयोग सराहनीय रहा। वर्ष १९९७ में कत्ल के लिए जाते २५० बछड़े पुलिस ने पकड़े जिला प्रशासन द्वारा संघ को देखभाल हेतु सुपुर्द किए । इस पूरे गोवंश की संधारणा स्थानीय दानदाताओं एवं जन सहयोग से की गई। इस दौरान अधूरे पड़े भवन का कार्य भी पूर्ण करवाया गया।  धीरे-धीरे इस गौशाला ने एक विस्तृत रूप धारण कर लिया है।  गोशाला की आवश्यकता को देखते हुए दिनांक १५ जून १९९७ को महोपाध्याय ललित प्रभ सागर जी एवं पूज्य श्री शांतेश्वर जी महाराज के करकमलों से गोधन शेड की नींव का मुहूर्त किया गया। उनके शुभ आशीर्वाद, स्थानीय जन सहयोग एवं जिला ग्रामीण विकास अभिकरण जोधपुर की मदद से एक ८१ x२७   फीट के ३ नए बाड़े सभी सुविधाओं से युक्त निर्माण करवाए गए। गौशाला में बढ़ते गोवंश के साथ-साथ समय-समय पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड चेन्नई से जमीन योजनाओं में सहयोग प्राप्त कर गौशाला शेड, बायोगैस, खाद उत्पादन आदि के शेड निर्माण कराए गए।

केंद्र पर संचालित गतिविधियां
  1. गोरक्षण एवं गौसंवर्धन
  2. प्राणी मित्र पशु चिकित्सालय
  3. पक्षी विहार
  4. बायोगैस संयंत्र 
  5. बायो सीएनजी प्लांट
  6. जैविक खाद उत्पादन
  7. पंचगव्य एवं हर्बल चिकित्सालय
  8. रसायन शाला 
  1. पंचगव्य औषध एवं बिक्री केंद्र
  2. गौग्रास वितरण
  3. जल मंदिर
  4. सुरभि उत्सव लोक
  5. हर्बल उध्यान
  6. पक्षी चिकित्सा कक्ष
  7. तुला दान
  8. गौ स्पर्श चिकित्सा (लकवा, वेरीकोस एवं हाथी पैर का उपचार)

 

गौशाला मुख्य द्वार
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गौशाला गौ निवास
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उद्देश्य

केन्द्र पर की जा रही समस्त गतिविधियों का मुख्य प्रयोजन असहाय गोवंश का संरक्षण, अच्छी नस्ल के सांड, बैल एवं बछडियॉ तैयार कर गोपालकों को वितरण, पर्यावरण रक्षा को मध्यनजर रखते हुये विभिन्न जैविक खादों के उत्पादन, चिकित्सा की दृष्टि से पंचगव्य एवं हर्बलऔषधियों का निर्माण एवं प्रयोग, प्रशिक्षण की दृष्टि से समय-समय पर केन्द्रों पर रख कर व्यवहारिक प्रशिक्षण देना, जन मानस में गोमाता की महत्ता बढ़े इस हेतु गोदान के लिये प्रेरित करना एवं गोरक्षण हेतु धन संग्रह करना।

निवेदन

श्री कन्हैया गौशाला में, किसानों  एवं  युवाओं को गोपालन, थार पारकर नस्ल के संवर्धन और जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

सभी जन सहयोगियों से विनम्र प्रार्थना है कि असहाय गोवंश रक्षण हेतु राजस्थान गो सेवा संघ, श्री कन्हैया गौशाला को गौ विकास के कार्यो में ज्यादा से ज्यादा रुचि एवं जनसहयोग दें और किसान, संस्थान से सहयोग लेकर देशी गोवंश अपने स्तर पर पालें ।   

दान देने के लिए कृपया अनुरोध टैब देखें