श्री कन्हैया गौशाला , जोधपुर के वेब पटल पर आपका स्वागत है
श्री कन्हैया गौशाला, जोधपुर की स्थापना एवं विकास
कन्हैया गौशाला जोधपुर का प्रारंभ वर्ष १९९४ में गौ हत्या के लिए जाते हुए गोवंश को यहां के समाज सेवकों ने बचाकर संघ की पाल रोड स्थिति भूमि पर रखने का निर्णय लिया इस हेतु श्री कन्हैया गौशाला की स्थापना की गई। इस कार्य में मुख्य समाजसेवी कार्यकर्ता स्वर्गीय त्रिलोक चंद जी गोलेछा, स्वर्गीय मानिक चंद जी संचेती, स्वर्गीय मधुसूदन जी व्यास, स्वर्गीय दुर्गा प्रसाद जी साबू, स्वर्गीय महेंद्र जी लोढ़ा, स्वर्गीय भंवर लाल जी कोठारी व स्वर्गीय आसु लाल जी बडेरा का सहयोग सराहनीय रहा। वर्ष १९९७ में कत्ल के लिए जाते २५० बछड़े पुलिस ने पकड़े जिला प्रशासन द्वारा संघ को देखभाल हेतु सुपुर्द किए । इस पूरे गोवंश की संधारणा स्थानीय दानदाताओं एवं जन सहयोग से की गई। इस दौरान अधूरे पड़े भवन का कार्य भी पूर्ण करवाया गया। धीरे-धीरे इस गौशाला ने एक विस्तृत रूप धारण कर लिया है। गोशाला की आवश्यकता को देखते हुए दिनांक १५ जून १९९७ को महोपाध्याय ललित प्रभ सागर जी एवं पूज्य श्री शांतेश्वर जी महाराज के करकमलों से गोधन शेड की नींव का मुहूर्त किया गया। उनके शुभ आशीर्वाद, स्थानीय जन सहयोग एवं जिला ग्रामीण विकास अभिकरण जोधपुर की मदद से एक ८१ x२७ फीट के ३ नए बाड़े सभी सुविधाओं से युक्त निर्माण करवाए गए। गौशाला में बढ़ते गोवंश के साथ-साथ समय-समय पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड चेन्नई से जमीन योजनाओं में सहयोग प्राप्त कर गौशाला शेड, बायोगैस, खाद उत्पादन आदि के शेड निर्माण कराए गए।
केंद्र पर संचालित गतिविधियां
|
|
गौशाला मुख्य द्वार
गौशाला गौ निवास
उद्देश्य
केन्द्र पर की जा रही समस्त गतिविधियों का मुख्य प्रयोजन असहाय गोवंश का संरक्षण, अच्छी नस्ल के सांड, बैल एवं बछडियॉ तैयार कर गोपालकों को वितरण, पर्यावरण रक्षा को मध्यनजर रखते हुये विभिन्न जैविक खादों के उत्पादन, चिकित्सा की दृष्टि से पंचगव्य एवं हर्बलऔषधियों का निर्माण एवं प्रयोग, प्रशिक्षण की दृष्टि से समय-समय पर केन्द्रों पर रख कर व्यवहारिक प्रशिक्षण देना, जन मानस में गोमाता की महत्ता बढ़े इस हेतु गोदान के लिये प्रेरित करना एवं गोरक्षण हेतु धन संग्रह करना।
निवेदन
श्री कन्हैया गौशाला में, किसानों एवं युवाओं को गोपालन, थार पारकर नस्ल के संवर्धन और जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
सभी जन सहयोगियों से विनम्र प्रार्थना है कि असहाय गोवंश रक्षण हेतु राजस्थान गो सेवा संघ, श्री कन्हैया गौशाला को गौ विकास के कार्यो में ज्यादा से ज्यादा रुचि एवं जनसहयोग दें और किसान, संस्थान से सहयोग लेकर देशी गोवंश अपने स्तर पर पालें ।
दान देने के लिए कृपया अनुरोध टैब देखें
श्री कन्हैया गौशाला , जोधपुर की गतिविधियॉं
गोरक्षण एवं गोसंवर्धन
केन्द्र अपनी स्थापना से ही असहाय गोवंश का रक्षण करता रहा है। केन्द्र पर 1000 से 1400 गोवंश समय-समय पर रहा है। केन्द्र का सदैव यह प्रयास रहा है कि असहाय गोवंश किस प्रकार उपयोगी हो इसलिए अच्छी नस्ल के शुद्ध थारपारकर सांड रखकर प्रजनन के माध्यम से अच्छे बछडे-बछडियॉ तैयार कर गोपालकों को वितरित की जाती हैं। केन्द्र पर इस अथक प्रयास से लगभग 150-170 गायें दूध दे रही है। उत्पादित दुग्ध को उपभोक्ताओं तक दो मोटरसाईकिल दुग्ध वितरक एवं केन्द्र पर एक दुग्ध वितरक वितरण करते हैं ।
प्राणी मित्र पशु चिकित्सालय
श्री कन्हैया गौशाला परिसर में पश्चिम दक्षिण हिस्से में प्राणी मित्र संस्थान के सहयोग से वर्ष 2009-2010 में एक पशु चिकित्सालय का निर्माण करवाया हुआ है। जिसकी लागत लगभग 5,40,000/- है । इसमें गौशाला की बीमार, अपंग एवं स्थानीय गोवंश के उपचार की भावना के साथ प्रारम्भ किया गया था। इसके संचालन हेतु तीन पशुधन अधिकारी अपनी सेवाऐं देते हैं। इस चिकित्सालय में औषधि स्टॉक डॉक्टर का कमरा एवं उपचार के पश्चात् सुरक्षित रखने हेतु एक जालीनुमा वार्ड बना हुआ है।
पंचगव्य एवं हर्बल चिकित्सालय
केन्द्र पर राजस्थान गो सेवा आयोग एवं भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के माध्यम से गोमूत्र से विभिन्न रोगोपचार हेतु पंचगव्य पर हो रहे अनुसंधान के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किये जाते हैं। उत्पन्न औषधियों के विभिन्न रोगों पर किये प्रयोगो से प्राप्त आश्चर्यजनक सुपरिणामों से उत्साहित होकर, केन्द्र पर श्रीमान लक्ष्मीमल जी सिंघवी द्वारा एम.पी. कोटे से २५ लाख रुपये की लागत से एक चिकित्सालय भवन बनाया गया है, जिसमें अंतरंग एवं बहिरंग उपचार की व्यवस्था उपलब्ध है। केन्द्र पर समय-समय पर महावीर इन्टरनेशनल, सामाजिक संस्थाओं एवं श्री कन्हैया गौशाला के संयुक्त तत्वावधान में विशेष कैंसर उपचार के कैम्प लगाये जाते हैं। यहाँ गोमूत्र के अतिरिक्त रोगियों को हर्बल औषधियाँ भी दी जाती हैं। इन औषधियों को चिकित्सालय के सामने स्थित २ बीघा भूमी पर विकसित हर्बल गार्डन में ही उत्पन्न किया जाता है। वर्तमान में यहॉ पर १ ५ रोगियों के रहने की व्यवस्था उपलब्ध है। इसके संचालन हेतु २ वैद्य, १ नर्स एवं २ उपचारिकाऐं रखी हुई हैं ।
पंचगव्य चिकित्सालय में आउटडोर चिकित्सा की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां कैंसर, गुर्दा रोग, हृदय रोग, कोलेस्ट्रोल, खून की कमी, कब्जी, मोटापा कम करने, अस्थमा रांग, सफेद दाग, माइग्रेन, सोरायसिस आदि की पंचगव्य / आयुर्वेदिक व हर्बल विधि से चिकित्सा की जाती है। साथ ही, पंचगव्य कैंसर चिकित्सालय में १५ बिस्तरों का आतंरिक अस्पताल भी कार्यरत है। यहॉ पर सभी प्रकार के कैंसर (जैसे कि मुंह, गला, ब्रेस्ट, गर्भाशय तथा अन्य सभी प्रकार के ट्यूमर गांठ इत्यादि) से पीडित रोगियों का उपचार किया जाता है।
गौ-स्पर्श चिकित्सा से लकवा, हाथी पैर व टेढ़े पैरों का उपचार
श्री कन्हैया गौशाला परिसर के चिकित्सा प्रभार के अंतर्गत गौ-स्पर्श चिकित्सा द्वारा लकवा (पैरालाइसिस) वेरीकोज वेन्स, हाथी पॉव व टेढ़े पैर का निशुल्क उपचार किया जा रहा है। श्री कन्हैया गौशाला में पिछले छह माह में १८ लकवा रोगियों का गौ-स्पर्श चिकित्सा से सफल उपचार किया गया है। लकवा के रोगियों में पैरों, हाथ एवम् मुंह पर लकवे का प्रभाव था जिसे मात्र आठ से दस दिन में सफलतापूर्वक उपचार कर रोगियों को स्वस्थ कर दिया। गत दिनों एक ७० वर्षीय महिला जो हाथी पैर बीमारी से ग्रस्त होने के साथ पैर का पंजा ३० डिग्री टिल्ट होने से चलने फिरने एवं स्वयं का आधारभूत कार्य करने में भी असफल थी। कन्हैया गौशाला में उक्त महिला का पिछले ३० दिनों से प्रतिदिन गौ-स्पर्श चिकित्सा से उपचार किया गया है। महिला के पैरो के पंजे सीधे होने के साथ पैरों की मोटाई भी ३ इंच की कमी आने के साथ ८ किलो वजन कम हुआ है। उक्त महिला खड़े होने या चलने में जहाँ असमर्थ थी, अब अपने पैरों से चलने के साथ स्वयं के नित्य कर्म सहित सभी काम करने में सक्षम हो गई है। श्री कन्हैया गौशाला वैद्यों की निगरानी में अब घुटनों के दर्द व साइटिका का उपचार गौ-स्पर्श चिकित्सा से प्रारंभ करने जा रहा है।
पक्षी विहार
श्री कन्हैया गौशाला के पिछवाडे में, पेड़ों से घिरे शांत स्थल के बीच, एक कबूतर आश्रय स्थल का निर्माण किया गया है, जो कि सम्पूर्ण सुरक्षा के साथ निर्मित, १६० फुट लम्बा, ४० फुट चौड़ा एवं २० फुट ऊँचा स्थल है। यहॉं पर कबुतरों के लिये प्रतिदिन दाना-पानी की माकूल व्यवस्था की जाती है। कबूतरों के आवास एवं प्रजनन के साथ, नन्हें कबूतरों के उड़ान भरने के लिये, पूर्ण सुरक्षित विशेष व्यवस्था है। कबूतरों को धूप वर्षा से बचाने के लिये झोपड़ीनुमा आश्रय स्थल एवं छतरियों का प्रावधान भी किया गया है। कबूतरों को निकट से निहारने के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था भी उपलब्ध है ।
थोड़ा सा पानी थोड़ा सा दाना |
सौभाग्य हैं कबूतरों का आना ||
कितना अच्छा कितना भोला प्राणी |
जिसे चाहिए थोड़ा दाना थोड़ा पानी ||
जीव दया की भावना से उत्प्रेरित अनुपम योजना 'पक्षी विहार' - आइये बनें पक्षियों का सहारा
गज पक्षी चिकित्सालय
कबूतरों के दाने हेतु निर्मित १६०x४० फीट के क्षेत्र में चुग्गा घर बनाया हुआ है। इस चुग्गा घर के नीचे एक आकर्षक व सभी सुविधाओं से युक्त गज पक्षी चिकित्सालय का निर्माण किया गया है। । इस पक्षी चिकित्सा कक्ष में सभी प्रकार के घायल पक्षियों के उपचार की व्यवस्था उपलब्ध है।
पंचगव्य औषध एवं गोघृत बिक्री केन्द्र
केन्द्र पर स्वयं एवं अन्य पंचगव्य रसायनशालाओं द्वारा अनुसंधानित औषधियों के प्रयोग से उपचार किया जाता है, जिसके लिए एक औषध बिक्री काउण्टर केन्द्र स्थापित किया हुआ है। साथ ही, यहॉं पर गौशाला निर्मित, शुद्ध गाय का बिलोवन घी भी बिक्री के लिये उपलब्ध है। इनके अतिरिक्त, यहॉं पर, जयपुर गो संवर्धन समिति द्वारा निर्मित "गोरस घी" भी का भी विक्रय किया जाता है। यह काउन्टर जनता के लिए प्रति दिन प्रात: ९ से सायं: ५ बजे तक खुला रहता है।
गौग्रास वितरण
केन्द्र से 3 बैल गाड़े रोजाना प्रातः गौग्रास वितरण हेतु जोधपुर के विभिन्न क्षेत्रों में जाते हैं। इन बैल गाड़ों में रोटियाँ, हरा चारा, चापड़, चूरी एवं दानपात्र रखा जाता है। खाने योग्य सामग्री गोवंश को खिला दी जाती है एवं दानपात्र में प्राप्त राशि कार्यालय में जमा कर दी जाती है। इस व्यवस्था से शहर के काफी लोगों से गौशाला का जुड़ाव बना हुआ है।
नस्ल संवर्धन और जैविक खेती प्रशिक्षण
किसानों और युवाओं को गोपालन और थार पारकर नस्ल के संवर्धन के लिए गोशाला मैं प्रशिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध है। साथ में किसानों को जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण और मार्ग दर्शन भी दिया जाता है।
सुरभि उत्सव लोक
गौशाला के बीच आकर्षक सुरभि लोक का निर्माण कराया गया है। ६०x४० फीट के सभागार में पौराणिक कथाओं एवं भारतीय संस्कृति के अनुसार रामायण, महाभारत, कृष्ण लीला एवं विभिन्न देवी-देवताओं के आकर्षक चित्र का वॉल पेंटिंग के रूप में लगाए गए हैं,जो हर दर्शक को आकर्षित करते हैं। सभागार सभी आधारभूत सुविधाओं से परिपूर्ण है, जो सभी गौ सेवकों एवं गौ भक्तों के लिए निशुल्क उपलब्ध है। यहां पर जन्मदिवस,वैवाहिक वर्षगांठ,परिवार की पुण्य आत्माओं के श्रद्धांजलि कार्यक्रम तथा अन्य सामाजिक उत्सव आयोजित किए जा सकते हैं।
जल मंदिर
गौशाला प्रांगण में आगंतुकों के लिए एक जल मंदिर का निर्माण किया गया है जो आने वाली व्यक्तियों को ठंडा जल प्रदान करता है। यहाँ पर वितरित किया जाने वाला जल आ.रो. संयंत्र द्वारा स्वच्छ किया जाता है।
बायोगैस संयंत्र ऐवं विद्धयुत उत्पादन संयन्त्र
भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड एवं राजस्थान गो सेवा आयोग के अनुदान से केन्द्र पर वर्तमान में 45 एवं 60 घनमीटर के दो बायोगैस संयंत्र स्थापित किये गये हैं। इससे उत्पादित गैस से भट्टियाँ जलाकर गोमूत्र अर्क एवं लापसी बनाने में काम लिया जा रहा है। अतिरिक्त गैस से बिजली उत्पादन हेतु जनरेटर भी बायोगैस से चलाया जाता है। साथ ही गौशाला में रहने वाले गोपालकों व श्रमिकों को उनके कर्मचारी आवास तक खाना बनाने के लिए बायोगैस उपलब्ध कराई जाती है
बायो सी. एन. जी. संयन्त्र
गोबर ऊर्जा को सिद्ध करने की दृष्टि से केन्द्र पर वर्ष २०११-२०१२ में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग एवं आई.आई.टी. दिल्ली की सहभागिता से सी.एन. जी. संयन्त्र की स्थापना की गई। इस संयन्त्र के द्वारा बायोगैस में से कॉर्बन-डाई- ऑक्साईड हटाकर मिथेन से मारुति ईको वाहन व टाटा-४०७ ट्रक को चलाया जा रहा है। जिससे केन्द्र पर प्रदूषण रहित ईधन मिल रहा है। यह एक अनूठा प्रयोग है। इसे वृहद स्तर पर करने हेतु सरकार प्रयासरत है। जिससे गोबर की कीमत बढ़ेगी, तथा गौशालाओं को गोबर की उचित कीमत मिलेगी।
हर्बल उध्यान एवं रसायन शाला
रसायनशाला चिकित्सालय में उपयोग की जाने वाली २८ विभिन्न प्रकार की औषधियां रसायनशाला में निर्मित की जाती हैं । इन औषधिओं के निर्माण हेतु परिसर में ही एक हर्बल गार्डन विकसित किया गया है। इसी हर्बल गार्डन से ही उत्पादित जड़ी बूटियों से ही परिसर में ही स्थित रसायन शाला में कैन्सर, हृदय रोग, अस्थमा, पाइल्स रोग, खून की कमी, कोलेस्ट्रॉल, सभी प्रकार के दर्द से मुक्ति व अन्य रोगों के उपचार हेतु दवाइयों का निर्माण किया जाता है। साथ ही ताजा जड़ी बूटियाँ भी रोगियों को उपलब्ध करवाई जाती हैं।
जैविक खाद उत्पादन
विभिन्न रसायनिक खादों एवं कीटनाशकों के लगातार प्रयोग से हो रहे दुष्परिणामों को मध्यनजर रखते हुये पर्यावरण एवं मानवहित में अधिक से अधिक जैविक खाद का प्रयोग हो, इस कारण केन्द्र में जैविक खाद उत्पादन किया जाता है। इन जैविक खादों ( कॉम्पोस्ट एवं वर्मी कॉम्पोस्ट) को किसानों को उचित दामों पर उपलब्ध करवाया जाता है। इससे जोधपुर संभाग में एक क्रान्ति सी आई है। वर्तमान में प्रतिदिन ५ टन खाद उत्पादन कर बिक्री की जा रही है। वर्षभर में करीब एक करोड़ रुपये की खाद इस केन्द्र पर विक्रय किया जाता है।
कीट नियंत्रक
गौशाला में फसलों व बगीचों के पोधों को कीड़ों, दीमक और अन्य जंतुओं से बचाने के लिए गौ मूत्र, नीम व लहसुन से कीट नियंत्रकों का उत्पादन किया जाता है। यह कीट नियंत्रक, किसानों व अन्य लोगों को उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाए जाते हैं।
विकृत होती जीवन शैली - बढ़ते रोग
देश में कृत्रिम रासायनिक खाद तथा कीटनाशक दवाईयों के बढ़ते उपयोग से अन्न, फल, सब्जी सभी में जहर की मात्रा बढ़ने से भिन्न भिन्न बीमारियों का प्रकोप व प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
देश भर में कैन्सर के मरीजों की संख्या में भी भारी वृद्धि चिन्ताजनक है। इसका मूल कारण कीटनाशकों व रासायनिक खाद के प्रयोग से विषयुक्त हुए अन्न, फल, सब्जी आदि खाने में आ रहा हैं। कैन्सर के अलावा अन्य बीमारियों ने भी कोई भी घर को अछूता नहीं छोड़ा है जिसमें प्रमुख रूप में हार्ट, ब्लड प्रेशर, गुर्दा रोग, मोटापा, कब्जी, एसिडिटी, सफेद दाग, कोलस्ट्रोल तथा डायबिटिज घर घर में दस्तक दे चुके है। इन रोगों को नियंत्रित करने व उपचार के लिए अधिकांश वैद्यों एवं विशेषज्ञों ने पंचगव्य, गौमूत्र अर्क एवं विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को उपयोगी माना है। भाव प्रकाश सुश्रुत संहिता में भी गोमूत्र व गोबर के गुणों के वर्णन में पंचगव्य गोमूत्र को कैन्सर जैसे असाध्य रोगों के उपचार में प्रभावी माना है । देशी गाय के पंचगव्य अर्थात् दूध, दही, घी, गौमूत्र एवं गोबर रस में रोग प्रतिकारक शक्ति होने के कारण कैंसर पीड़ित प्रथम तथा द्वितीय स्तर तक के रोगी को कैन्सर मुक्ति के उपचार में प्रभावी औषधी सिद्ध हुई है।
कैन्सर के प्रकार व संकेत
देश में कृत्रिम रासायनिक खाद तथा कीटनाशक दवाईयों के बढ़ते उपयोग से अन्न, फल, सब्जी सभी में जहर की मात्रा बढ़ने से भिन्न भिन्न बीमारियों का प्रकोप व प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
अबुर्द (Neoplasm) एक विशिष्ट ट्यूमर (Tumour) ग्रोथ है । इन अबुदों की अनियंत्रित ग्रोथ लगातार देखी जा सकती है।
Simple Tumour or Benign Malignant Tumour:
कारण : तम्बाकू, गुटका, सुपारी, सूंघनी, क्रोनिक गैसट्रिक अल्सर
Veneral Diseases, Poor Genital Hygien, Vaginal Trauma Fibro, Cystic breast Diseases, A lump of Nodules in the Breast
विभिन्न अंगों के कैंसर : होंठ, जीभ, गाल, मसूड़ों का कैन्सर, आमाशय का कैन्सर आहार नली व गले का कैन्सर, गर्भाशय व ग्रीवा का कैन्सर, स्तन कैन्सर, फेफड़े व लीवर कैन्सर, बीज (Ovary) व डिम्ब ग्रंथि का कैन्सर
कैन्सर रोग का सार्थक उपचार
उपरोक्त प्रकार के कैन्सर रोगों में गांठ में दर्द व उसे गलाने की औषधि के साथ कैन्सर उकाला पाउडर, पंचगव्य, गोबर रस की पिचकारी के साथ कांचनार अर्क, लोखंडी चोपचिनी अर्क, रक्त शुद्धि अर्क, अमृत संजीवनी अर्क, ग्वारपाठा खारा (Aloevera) का रस, नीम गिलोई व ज्वार का रस बहुउपयोगी सिद्ध हुए है।
वर्ष २००३ से २०१७ के अन्तराल में कामधेनु औषधालय वर्घा एवं मालेगांव के श्री केसरी चन्द मेहता के नेतृत्व में अब तक देश भर के कैन्सर उपचार के सैकड़ों शिविर आयोजित किए जा चुके है जिसमें १४वां शिविर जोधपुर में श्री कन्हैया गौशाला एवं महावीर इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में १६ जुलाई २००७ से 25 जुलाई २००७ तक दस दिवसीय ऐतिहासिक निः शुल्क आवासीय शिविर में 317 रिकार्ड कैन्सर के मरीजों का उपचार शुरु किया गया जिसमें १८० मरीजों ने एक माह पश्चात २५ अगस्त २००७ के फोलोअप कैम्प में भी उपस्थित हुए और उन्हें आशातीत प्रभावी लाभ प्राप्त हुआ। जिसमें गले, मुंह, स्तन, गर्भाशय व भोजन नली के कैन्सर रोगियों को पीड़ा से राहत के साथ ट्यूमर घटने व घाव भरने में आश्चर्यजनक लाभ हुआ है। इस शिविर में केवल नली द्वारा द्रव्य भोजन लेने वाले रोगी को नली से मुक्ति ही नहीं मिली अपितु वे सीधे मुंह से नियमित ठोस भोजन लेने लग गए।
इस कड़ी में ठोस परिणामों से प्रेरित होकर कन्हैया गौशाला के तत्वाधान में जोधपुर में पंचगव्य तथा आयुर्वेद जड़ी बूटियों के उपचार हेतु २००७ से कैन्सर इण्डोर चिकित्सालय व अन्य रोगियों हेतु आउट डोर उपचार की सम्पूर्ण सुविधाएँ यहां उपलब्ध है। यहाँ निरन्तर आशातीत सफलताओं के साथ चिकित्सालय अग्रसर है।
नन्दन कन्हैया गौशाला - झंवर (जोधपुर)
वर्तमान में एक नई गौशाला, नन्दन कन्हैया गौशाला के नाम से, झंवर ग्राम में 22 बीघा भूमी पर निर्माणाधीन है। अभी तक यहां लगभग 3 करोड रुपए का कार्य हो चुका है। यहां पर नंदी के रहने के लिए पाँच बड़े बाड़े तथा गायों के लिए चार बाड़े बनाए गए हैं। कर्मचारियों के रहने के आवास भी निर्माणाधीन हैं। गायों के पीने के पानी लिए दो ट्यूब वेलों का निर्माण किया गया है। एक चारा गोदाम और जैविक खाद बनाने का कारखाना भी बनाया गया है। समस्त कार्य पूर्ण होने पर इस नंदी गौशाला का उपयोग आरंभ किया जाएगा।
| राजस्थान गो सेवा संघ द्वारा संचालित गौशालाएं | ||
| क्र. स. | नाम और पता | सम्पर्क |
| 1 | राजस्थान गो सेवा संघ, इन्कम टैक्स कॉलोनी के सामने, टोंक रोड, दुर्गापुरा, जयपुर, राजस्थान | 0141-2545954 |
| 2 | राजस्थान गो सेवा संघ, गोपालन केन्द्र, ग्राम मलिकपुर, ठीकरिया बावड़ी, जिला सीकर, राजस्थान | 0141-2551310 |
| 3 | राजस्थान गो सेवा संघ, कृषि गोसेवा केन्द्र, छत्तरगढ़, बीकानेर, राजस्थान | 01520-2110049 |
| 4 | राजस्थान गो सेवा संघ, गोपालन केन्द्र, बीछवाल/सुरधना, बीकानेर, राजस्थान | 0151-2200749 |
| 5 | राजस्थान गो सेवा संघ, श्री कृष्ण गौशाला, खाजूवाला, बीकानेर, राजस्थान | 01520-232782 |
| 6 | राजस्थान गो सेवा संघ, कृषि गो सेवा केन्द्र, अनूपगढ़, श्रीगंगानगर, राजस्थान | 01498-252237 |
| 7 | राजस्थान गो सेवा संघ, गोसदन, बाजूवाला, श्रीगंगानगर, राजस्थान | 01507-285201 |
| 8 | राजस्थान गो सेवा संघ, श्री शिव गौशाला, रावलामण्डी, श्रीगंगानगर, राजस्थान | 01506-263135 |
| 9 | राजस्थान गोसेवा संघ, श्री हनुमान गो संवर्धन केन्द्र, मुण्डा, हनुमानगढ़, राजस्थान | 01552-282394 |
| 10 | राजस्थान गोसेवा संघ, श्री कन्हैया गोशाला, पाल बालाजी मंदिर के पास, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान. | 0291-2766572 |
| 11 | राजस्थान गोसेवा संघ, संत उद्धवदास कन्हैया गौशाला, रेल्वे स्टेशन के पीछे, गाँधी रोड, जैसलमेर, राजस्थान | 02992-252535 |
| 12 | राजस्थान गोसेवा संघ, गोपालन केन्द्र, सुलताना, जैसलमेर, राजस्थान | 02992-252535 |
| 13 | राजस्थान गोसेवा संघ, श्री ऋषि गोपाल गौशाला, बाप, तह. फलोदी, जोधपुर, राजस्थान | 02921-277129 |
पुण्यार्थ एवं सेवा कार्यो में आप भी सहयोगी बनें
- एक गाय गोद लेकर, उसके भरण पोषण हेतु 1500 रुपये प्रतिमाह प्रदान कर के, गौ सेवा का लाभ प्राप्त करें अथवा जीवन पर्यन्त गाय के भरण पोषण हेतु एक लाख रुपये की सावधि जमा (FD) जमा करावें।
- कन्हैया गौशाला में तुलादान की व्यवस्था उपलब्ध है इसमें दानदाता किसी भी व्यक्ति के वजन के अनुसार हरा चारा, सूखा चारा, गेहूं अथवा कोई भी अन्य पदार्थ, उस वजन के अनुसार गौशाला में दान कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए आप गौशाला के कार्यालय में संपर्क करें।
- अपने पूर्वजों की स्मृति, बच्चों के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ पर गाय को लापसी, पक्षियों को दाना प्रदान कर श्रेष्ठ जीवदया का उपहार प्रदान करें
- वृहद कबूतर व पक्षी विहार के दाने हेतु प्रति परिवार 10 बोरी ज्वार / मक्की प्रतिवर्ष का संकल्प लेकर जीव दया की अनुकरणीय सेवा में योगदान प्रदान करें।
- चुग्गा (पक्षी दाना) के संकल्प कर मिती बुक कराएं।
- 4 वर्ष से 12 वर्ष के बच्चे को गौ-मित्र योजना के माध्यम से संस्कारित करें और बच्चों को देशी गाय के औरे से लाभान्वित करें। गौ-मित्र बनने का टोकन कार्यालय से प्राप्त करें।
- प्रतिदिन 10 रुपये की हरे घास की पुली अथवा एक गौ ग्रास की रोटी या पोषाहार लड्डू नियमित रूप से डालने हेतु प्रोत्साहित करें।
दान प्रदाता अपना दान NEFT/ IMPS अथवा PhonePe से करें:
राजस्थान गौ सेवा संघ को दिया हुआ दान, इनकम टैक्स की धारा 80 जी के तहत छूट का पात्र है।
बैंक का नाम और शाखा: भारतीय स्टेट बैंक, शाखा-पाल रोड (State Bank of India, Branch-Pal Road)
खाता धारक का नाम: Rajasthan Gou Seva Sangh / श्री कन्हैया गौशाला
NEFT/IMPS के लिए अकाउंट नंबर: 36117379400, IFSC Code: SBIN0015993
UPI ID: GOSEWA@IBL
PhonePe के लिए मोबाईल नंबर: 8766028940

श्री कन्हैया गौशाला को NEFT/IMPS/UPI/PhonePay/PayTM इत्यादि से दान देने पर, दान की तारीख और दान का संदर्भ (Reference) नोट करें
तत्पश्चात, दान की प्रविष्टि के लिए Donation to Kanhaiya Goushala पर जाएं और दान की प्रविष्टी करें
श्री कन्हैया गौशाला, वित्तीय वर्ष 2022-23 वार्षिक प्रगति रिपोर्ट
- 6 नए बाडो का निर्माण किया गया जिसमे एक छोट बछड़ो के लिए तैयार किया गया
- 2 बाडो में टीन शैड समेत नव निर्माण किया गया
- 3 बाड़े भरती भरवा कर ऊपर उठाये गए
- प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी जन्माष्टमी का उत्सव मनाया गया
- गौशाला में सरकार की मदद से रोड़ का निर्माण करवाया गया(जोधपुर विकास प्राधिकरण द्वारा )
- सत्संग भवन में चित्रकारिता करवाई गया (सुरभि उत्सव लोक) सभागार
- कर्मचारी के रहने के लिए नया कमरे का निर्माण
- हर्बल उद्यान में लाइट लगावाई
- 3 नये बैल ख़रीदे
- कबूतर चुग्गाघर के नीचे पक्षी चिकित्सालय का निर्माण तथा पूरे क्षेत्र को पौराणिक भीती चित्र से
दर्शनीय स्थल बनाया - गौ-स्पर्श चिकित्सा हेतु अलग चैम्बर में लकवाग्रस्त रोगियों, हाथी पैर से पीड़ित रोगियों और वेन का सफल उपचार शुरू किया है. पिछले 6 महीने में 18 रोगियों का उपचार किया गया है
- श्री कन्हैया गौशाला के अधीनस्थ नवनिर्मित झवर नंदी कन्हैया गौशाला का काम तेजी से प्रगति
की ओर अग्रसर है, नंदी गौशाला हेतु 5 बड़े बाड़े बनाए जा रहे हैं व एक नया ट्यूबेल खुदवा कर
स्थापित किया जा चुका है इसके अलावा गायों हेतु 4 बाड़े, एक चारा गोदाम तथा खाद निर्माण
हेतु 60’ X 40’ साइज का हॉल पूरी तरह निर्मित किया जा चुका है. - नंदी कन्हैया गौशाला में सवा करोड़ रुपए खर्च किया जा चुका है, जिसका राज्य सरकार में
भामाशाह का सहयोग शामिल है सरकार व जिला परिषद 30 लाख रुपए अगले दो-तीन माह में
उपलब्ध करवाएगी - कन्हैया गौशाला में नवनिर्मित सुरभि उत्सव लोक (सभागार), पक्षी चिकित्सालय तथा नंदी गौशाला का उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया जाने की संभावना है
- झंवर स्थित नंदी कन्हैया गौशाला की 5 बीघा भूमि में सुपर नेपियर घास लगाई जा रही है.
- जिला परिषद जोधपुर (राजस्थान सरकार) के माध्यम से वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था के साथ
डिग्गी निर्माण, गोबर गैस प्लांट तथा कंपोस्ट खाद बनाने के पिट्स लिए निर्माण कराए जाएंगे. इसकी संपूर्ण राशि राज्य सरकार उपलब्ध करा रही है. - झंवर स्थित नंदी गौशाला में वृहद स्तर पर पौधारोपण कराया जा रहा है जिसमें कुल एक हजार
वृक्षारोपण का कार्यक्रम जुलाई में किया जाएगा. अभी तक वहां 200 पौधे लगाए जा चुके हैं जो वृक्ष
बन चुके है. - चालीस गोपालक व अन्य कर्मचारियों की आवास व्यवस्था का नवीनीकरण एवं उन परिवार को निशुल्क गोबर गैस उपलब्ध कराई जा रही है.
- श्री कन्हैया गौशाला के प्रवेश द्वार पर आकर्षक श्री कृष्ण गौ माता मंदिर के निर्माण सहित वर्ष
पर्यंत जन्माष्टमी, अन्नकूट समारोह सहित अन्य आयोजन नियमित रूप से होते है.
श्री कन्हैया गौशाला
पाल रोड, पाल बालाजी मंदिर के पास, जोधपुर
फोन: 0291-2766572, 73
मोबाइल: 8766028940
Shri Kanihaiya Gaushala
Pal Road, Near Pal Balaji Temple, Jodhpur
Phone: 0291-2766572, 73
Mobile: 8766028940
श्री कृष्ण गौमाता मंदिर
श्री कन्हैया गौशाला में श्री कृष्ण गौमाता मंदिर का उद्घाटन वर्ष 2022 में किया गया। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर बहुत ही सुंदर और मनोरम कृष्ण भगवान की मूर्ति लगी हुई है। मंदिर में सुबह और शाम दोनों आरती की जाती है इस मंदिर के अंदर कृष्ण भगवान के साथ गौ माता की मूर्ति स्थापित की गई है।
श्री कन्हैया गौशाला चित्र दीर्घा
Consultations

Kamdhenu Mata

गौशाला में गायें
